PM Free Yojana 2026 विश्वकर्मा योजना शुरुआत में डीबीटी के माध्यम से 15,000 रुपये
उद्घाटन वर्ष: 2023
योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रीय योजना
सूक्ष्म उद्यम मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई)
योग्यता: 18 वर्ष से अधिक आयु के पारंपरिक कलाकार और शिल्पकार जो 18 जापान में शामिल हों।
लाभ:

रजिस्टर:
वास्तुशिल्प के रूप में पुष्टि: पीएम वास्तुशिल्प प्रमाण पत्र और आई.डी. कार्ड
ऋण सहायता:
संपार्श्विक मुक्त उद्यम विकास ऋण:
1 लाख रूपये तक
2 लाख रुपए तक
5% रेस्तरां ब्याज दर:
भारत सरकार द्वारा 8% तक ब्याज अनुदान सीमा के स्वामित्व में
ऋण ऋण शुल्क भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा
कौशल विकास:
कौशल पहचान के बाद 5 दिन का प्रदर्शन प्रशिक्षण
15 और दिन की उन्नत ट्रेनिंग
प्रशिक्षण शुल्क: 500 रुपये प्रतिदिन
टूलकिट प्रोत्साहन:
शुरुआत में डीबीटी के माध्यम से 15,000 रुपये और ई-आरयूपीआई/ईवाउचर के माध्यम से इंटरनैशनल और 500 रुपये की दैनिक प्रथा, बाजार संपर्क, डिजिटल एकीकरण
लक्ष्य: कारीगरों और शिल्पकारों को उद्योग में उन्नत बनाना और निर्मित करना।
कुल परिव्यय: 5 वर्ष 2023-24 से 2027-28 के लिए 13,000 करोड़ रुपये।
पीएम आर्किटेक्चर एक केंद्रीय क्षेत्रीय योजना 17 सितंबर, 2023 को हाथ और उपकरण की सहायता से कार्य करने वाले पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी।
सुविधा:
18 परिवार आधारित पारंपरिक जमात में से किसी एक में हाथ और औज़ारों की सहायता से कार्य करने वाला कलाकार या शिल्पकार की स्थापना।
पंजीकरण के समय उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक है और पंजीकरण के समय वह रेलवे के स्वामित्व में सक्रिय रूप से व्यापार करती है।
पिछले 5 वर्षों में उनके द्वारा प्रधानमंत्री रोज़गार क्रिटिकल प्रोग्राम (पीएमईजीपी), मुद्रा, पीएम स्वनिधि के तहत ऋण नहीं लिया गया हो, ऐसे लोगों के समर्थकों द्वारा पूर्ण रूप से अपना ऋण चुकाया गया है।
प्रति परिवार केवल एक सदस्य (पति, पत्नी और ब्रह्मचारी बच्चे) को लाभ मिल सकता है।
अपवाद:
सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य पात्र नहीं हैं।
पात्र व्यवसाय:
राष्ट्रीय एमएसएमई मंत्रालयों की सूची को संचालन समिति द्वारा अद्यतन और नामित किया जा सकता है।
18 लोहे के बर्तन बनाने वाला, नाव बनाने वाला, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, पत्थर तोड़ने वाला, मोची/जूता बनाने वाला/जूता कलाकार, मि राजस्त्री, खिलौना/चटाईझाडू निर्माता/कोयर बुनकर, गुड़िया और खिलौना निर्माता, नाई, माला बनाने वाला, धोबी, ड्रेडी और मछली का जाल निर्माण में शिल्पकार और कलाकार शामिल हैं।
प्रमुख विशेषताएँ:
सिद्धांत: सिद्धांत को पीएम वास्तुशिल्प प्रमाण पत्र और आई.डी. प्राप्त कार्ड होता है, जिससे उन्हें सभी योजनाओं तक पहुंच प्राप्त होती है।
कौशल विकास:
प्रशिक्षण (5-7 दिन में 40 घंटे, 500 रुपये की दैनिक प्रवृत्ति): इसमें कौशल संवर्धन, आधुनिक उपकरणों का उपयोग, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स और विपणन शामिल हैं।
उन्नत प्रशिक्षण (15 दिन, 500 रुपये की दैनिक प्रवृत्ति): उद्यमिता, आधुनिक प्रौद्योगिकी और व्यवसाय विस्तार पर प्रशिक्षण।
किट प्रोत्साहन: ई-रुपी/ई-वाउचर के माध्यम से आधुनिक उपकरणों की खरीद, डिजाइन टूल और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए 15,000 रुपये तक की पेशकश की जाती है।
ऋण सहायता: व्यवसाय विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्याज अनुदान के साथ ‘उद्यम विकास ऋण’ के रूप में 1 लाख रुपये (प्रथम किस्त) और 2 लाख रुपये (द्वितीय किस्त) का गारंटी-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है।
किस्त (किश्त)
ऋण राशि (रु. में)
चुकौती की अवधि (महीने में)
प्रथम किस्त
1 लाख तक
18 माह
द्वितीय किस्त
2 लाख तक
30 माह
डिजिटल संबद्धता: ईसाइयों को प्रति डिजिटल सदस्यता पर 1 रुपये मिलेंगे, प्रति माह 100 इकाइयों तक, प्रत्येक डिजिटल भुगतान या रसीद के लिए सीधे उनकी खाते में जमा कर दी जाएगी।
बाज़ार: मानक प्रमाणन, ब्रांडिंग, विज्ञापन के लिए 250 करोड़ रुपये का कोष।
प्रचार और अन्य विपणन वाणिज्य
कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण:
राष्ट्रीय ऑपरेशन समिति (एनएससी): एनएससी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा सतही समिति होगी।
एनएससी को योजना के कार्यान्वयन के संबंध में सभी प्रमुख नीतिगत और दिशानिर्देश लेने और योजना में किसी भी संशोधन को मंजूरी देने का अधिकार आवश्यक होगा, जैसे कि व्यापार की अतिरिक्त जगह को शामिल करना।
समिति की बैठक, योजना-स्तरीय समीक्षा, पाठ्यक्रम में सुधार या आवश्यकता अनुसार समिति की राय में महत्वपूर्ण समझ जाने वाले किसी अन्य आकलन पर चर्चा के लिए वर्ष में कम से कम दो बार भागीदारी होगी।
राज्य निगरानी समिति (एसएमसी):
एसएमसी राज्य स्तर पर योजना के कार्यान्वयन और पर्यवेक्षण के लिए जिम्मेदारियां होंगी; यह एनएससी और क्षेत्रीय संगठनात्मक व्यवस्था के बीच एक सेतु के रूप में भी काम करेगा।
जिला कार्यान्वयन समिति (डीआईसी):
डीआईसी क्षेत्र स्तर पर योजना के लिए राज्य सरकार और अन्य उद्यमों के साथ समन्वय की आवश्यकता होगी।
ऋण निरीक्षण समिति:
क्रेडिट ओवरसीज समिति के अध्यक्ष सचिव (वित्तीय सेवा विभाग) जाएंगे और इसके सदस्यों में सचिव (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय), सचिव (व्याय), आरबीआई, सिडबी और सीजीटीएमएसई का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
समिति को ऋण के सुनिश्चितता की निगरानी और उसका वितरण सुनिश्चित करना। इसके अतिरिक्त, योजना के तहत ब्याज छूट की सीमा की समीक्षा और संशोधन करने का अधिकार इसके पास होगा।
कार्यान्वयन सेवाएं: एमएसएमई मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यम मंत्रालय (एमएसडीई), और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस)।
पर्यवेक्षण तंत्र:
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कार्यान्वयन पर नज़र रखने के लिए
कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयाँ (PMU)।
निधि उपयोग और लाभ परिणामों पर नज़र रखने के लिए डैशबोर्ड के साथ ऑनलाइन निगरानी प्रणाली (OMS)।
प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए NSC और SMC द्वारा नियमित समीक्षा।
आर्थिक सशक्तिकरण: वित्तीय सहायता, औपचारिक मान्यता और बेहतर ऋण पहुँच के माध्यम से कारीगरों की उत्पादकता, गुणवत्ता और व्यावसायिक मापनीयता को बढ़ाता है।
सांस्कृतिक संरक्षण: विरासत आधारित व्यापार को बनाए रखने के लिए आधुनिक कौशल, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय प्रोत्साहन को एकीकृत करते हुए पारंपरिक शिल्प का समर्थन करता है।
सामाजिक समावेशन और लैंगिक समानता: विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला कारीगरों को सशक्त बनाता है, और अनुसूचित जातियों और जनजातियों जैसे हाशिये पर पड़े समुदायों को समर्थन देकर समावेशिता को बढ़ावा देता है।
जनवरी 2025 तक इस योजना के तहत 26.87 लाख फसलों को सफलतापूर्वक पंजीकृत किया जा चुका है।