सीएपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट की जगह इंस्पेक्टरों को कंपनी कमांडर बनाए जाने का प्रस्ताव
सीएपीएफ में शामिल सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी में कैडर अधिकारियों को 16 साल बाद भी पहला प्रमोशन ना मिलने और बल में उनकी जगह आईपीएस को तरजीह देने वाले चल रहे विरोधों के बीच सीएपीएफ में शामिल एक फोर्स का वाययरलेस मैसेज सामने आया है। यह मैसेज पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव से संबंधित है। जिसमें पश्चिम बंगाल और असम में सीएपीएफ की नियुक्ति के दौरान असिस्टेंट कमांडेंट की जगह इंस्पेक्टर को कंपनी कमांडर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इंस्पेक्टरों को दी जा सकती है जिम्मेदारी
मैसेज में इसके पीछे का तर्क इंटरनेशनल बॉर्डर पर बड़े स्तर पर किए जाने वाले मैनेजमेंट को बताया है। जिसमें बॉर्डर सिक्योरिटी को देखते हुए वहां से ड्राफ्ट को चुनावी ड्यूटी में नहीं लगाने की बात कही गई है। कहा गया है कि पश्चिम बंगाल और असम में असिस्टेंट कमांडेंटों की जगह इंस्पेक्टरों को कंपनी कमांडर की यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
क्या है इसके पीछे कारण
हालांकि, सूत्र इसके पीछे की मूल वजह सीएपीएफ कैडर अधिकारियों में एडमिशन रहे विरोधों को मान रहे हैं। जिसमें सीएपीएफ कैडर में असिस्टेंट कमांडेंट (एसी) ग्रुप-ए की प्रारंभिक भर्ती की जगह इंस्पेक्टर को यह कमान संभालने के लिए कहा गया है। ताकि सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों की वजह से चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह का संभावित बाधाएं ना पैदा होने पाए।
सीएपीएफ अधिकारियों ने कही ये बात
सूत्रों का कहना है कि कोशिश की जा रही है कि जितने हो सके असिस्टेंट कमांडेंट को इसमें कम से कम शामिल किया जाए। जिससे की सीएपीएफ अधिकारियों और आईपीएस के बीच भी किसी तरह का कोई तनाव पैदा होने की नौबत ना आए। हालांकि, नाम ना छापने की शर्त पर सीएपीएफ के कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि हमारी मांगें वाजिब हैं और हमें सरकार से इनका पूरा होने का इंतजार भी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हममे से कोई भी असिस्टेंट कमांडेंट और इससे ऊपर का ग्रुप-ए का कोई कैडर अधिकारी अपनी किसी भी तरह की ड्यूटी से पीछे हटेगा या फिर उसमें कोई कोताही बरतेगा। अधिकारियों का कहना है कि हमारी कोई आप्स से लड़ाई नहीं है, बस हम तो अपना हक मांग रहे हैं।