किसानों के लिए खुशखबरी: अब 6 साल की KCC, कर्ज चुकाने को मिलेगा ज्यादा समय – rbi to make changes in kcc rules
भारतीय रिजर्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है। अब केसीसी की अवधि 5 से 6 साल होगी और ऋण सीमा खेती की लागत से …और पढ़ें

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बदलाव हो रहा है, जो किसानों के हित में होगा। अब केसीसी की अवधि पांच साल के बजाय छह साल की होगी।
ऋण की सीमा भी खेती की लागत के अनुसार जहाँ। ऋण सीमा को स्केल ऑफ फाइनेंस से जोड़ा जाएगा और ब्याज की राशि पूर्ववत रहेगी।
आरबीएआई ने जारी किया ड्राफ्ट, छह मार्च तक मांगे सुझाव
इसका उल्लेख भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ड्राफ्ट में है, जिस पर उसने छह मार्च तक सार्वजनिक सुझाव मांगे है। मसूदा में केसीसी की अवधि और ऋण की मात्रा के साथ प्रभावी क्षेत्र में विस्तार भी प्रस्तावित है।
इस नियम के प्रभावी हो जाने के बाद किसानों को औसतन अधिक मात्रा में ऋण तो मिलेगा ही, उसे चुकाने के लिए समय-सीमा में भी राहत मिलेगी।
इससे लंबी अवधि वाली खेती (गन्ना, फल आदि) के किसानों को स्वैच्छिक लाभ होगा, जिन्हें अधिक मात्रा में बारी-बारी से अधिक अवधि के लिए ऋण की आवश्यकता होती है।
हालांकि, बिहार में केसीसी के तहत ऋण देने में बैंकों की आनाकानी अभी तक चरम पर रही है। मसूदे में, आधुनिक कृषि के उद्देश्यों से, केसीसी के दायरे को बढ़ाया गया है।
अब मिट्टी परीक्षण, मौसम पूर्वानुमान, जैविक खेती प्रमाणीकरण, ड्रोन और स्मार्ट सिंचाई प्रणाली जैसे एग्री-टेक खर्च भी केसीसी में मान्य होंगे।
इसके अलावा केसीसी को यूपीएआई और सीबीडी (ई-रूपी) से जोड़ा जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि खाद-बीज बुवाई समय किसान अपने फोन से पेमेंट कर सकेंगे। इससे नकदी रखने का जोखिम नहीं रहेगा और लेन-देन में लेनदेन होगा। किसानों को आर्थिक दोहन नहीं होगा।
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केसीसी की अवधि : पहले केसीसी की ली पांच वर्ष तक थी और नवीनीकरण की आवश्यकता थी। अब यह छह वर्ष के लिए होगा। इससे किसानों को बैंकों के चक्कर से मुक्ति मिलेगी।
ऋण सीमा : ऋण सीमा का फसल-चक्र से होगा। यानी कि खाद-बीज, सिंचाई-मजदूरी आदि पर लागत के हिसाब से ऋण का होगा।
ब्याज दर : पांच लाख तक का ऋण सात प्रतिशत की दर से मिलेगा। समय से ऋण चुकता कर देने पर तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस तरह ब्याज की प्रभावी दर चार प्रतिशत ही रह जाएगी।
ऋण वापसी : ऋण चुकाने के नियम को फसल चक्र से जोड़ा गया है। कम अवधि वाली फसलें 12 माह और लंबी अवधि वाली फसलें 18 माह। इससे किसानों पर उस समय ऋण चुकाने का दबाव नहीं होगा, जब उनकी फसल बिकी नहीं होगी।
बिहार में 72 लाख से अधिक किसान हैं, लेकिन सितंबर, 2025 तक नया-पुराना मिलाकर कुल 616047 किसानों को ही केसीसी का लाभ मिला।
अगले पांच वर्षों में उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य है, जबकि बैंकों की 36 प्रतिशत ब्याज ने एक भी केसीसी नहीं दिया।
यह स्थिति तब है, जब नाबार्ड केसीसी के ब्याज पर एक प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान देने की घोषणा कर चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में 37400 करोड़ रुपये ऋण वितरण का लक्ष्य था, जबकि पहली छमाही तक मात्र 7066.58 करोड़ के ऋण बांटे गए।