पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए राज्य अपने हिस्से का 350 करोड़ खर्च करेगा
कल्याण विभाग ने वित्त विभाग से खाली थी राज्य की राशि खर्च करने की मात्रा
झारखंड के 4.14 लाख लाख (ओबीसी) छात्रों को इस साल पोस्ट स्कॉर्पियो की राशि नहीं मिली है। अब राज्य सरकार इस पागल में अपने हिस्से का 350 करोड़ रुपये खर्च करती है। वित्त विभाग ने इसकी मंजूरी दे दी है।

अकादमी सत्र 2024-25 में 2.32 लाख एकल छात्रों को केवल 17,931 बच्चों को ही छात्रवृत्ति का भुगतान किया गया। साहित्य सत्र 2025-26 में दो लाख से अधिक आवेदन आये, जिन पर अब तक निर्णय नहीं हुआ है। केंद्र के हिस्सों की राशि न मिलने के कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है।
नियमों के अनुसार: केंद्रीय भाग न मिलने की स्थिति में राज्य के हिस्सों की भारी लागत पर भी रोक रहती है। ऐसे में कल्याण विभाग ने वित्त विभाग से राज्य के हिस्सों की करीब 350 करोड़ की राशि खर्च करने की अनुमति दी थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
मुख्य बिंदु: राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में छात्रवृत्ति की राशि 1 लाख रुपये तक कर दी थी, जबकि केंद्र का अंशदान पहले की तरह 20 हजार रुपये बढ़ रहा है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि वह बड़ी रकम का भुगतान नहीं करना चाहती थी, क्योंकि इससे उसकी सहमति में वृद्धि नहीं हुई थी।
नल-जल योजना: केंद्र ने राज्य को 2554 करोड़ रुपए खर्च करने की मंजूरी दी
केंद्र सरकार ने नल-जल योजना के तहत राज्य के हिस्सों में 2554 करोड़ रुपये खर्च करने की राशि दी है। यह योजना केंद्र-राज्य की 50:50 पर आधारित है।
बजट बजट: वित्त विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में 511 करोड़ रुपये की कमाई की है। शेष राशि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में जारी हो सकती है।
पृष्ठभूमि: राज्य सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि यदि केंद्रांश (केंद्र का हिस्सा) नहीं मिल रहा है, तो राज्यांश (राज्य का हिस्सा) को खर्च करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अवधि विस्तार: यह योजना 2024 में समाप्त हो गई थी, जिसे केंद्र ने 2028 तक बढ़ा दिया है।
स्कूल को नहीं मिले कंपनी अनुदान के पैसे
वर्ष 2025-26 के लिए विद्वानों को कम्पोजिट अनुदान की राशि भी प्राप्त नहीं हुई है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत चालू वित्त वर्ष के बजट में इसका प्रोविजन नहीं किया गया था।
प्रभाव: भूकंप, बिजली, पानी और साफ-सफाई का काम प्रभावित हुआ है।
राशि: इस अनुदान के तहत स्कूलों को 25 हजार से 1 लाख रुपये तक मिलते हैं।
पिछले 3 वर्षों का ऑडिट-जोखा (ओबीसी स्कॉलर)
शिष्या सत्र कुल बच्चे बचपन विद्यार्थी
2022-23 3,37,269 3,33,182
2023-24 4,00,194 3,91,922
2024-25 2,32,047 17,931